एनएमडीसी ने अनुसूचित जनजाति युवाओं के लिए कौशल विकास प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किया
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छत्तीसगढ़ के बस्तर और दंतेवाड़ा जिलों में भारत की सबसे बड़ी लौह अयस्क उत्पादक कंपनी, नेशनल मिनरल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (एनएमडीसी), ने अपनी कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) पहल के तहत एक प्रेरणादायक कदम उठाया है। कंपनी ने 500 अनुसूचित जनजाति युवाओं के लिए एक परिवर्तनकारी कौशल विकास प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किया है, जिसका उद्देश्य आदिवासी समुदायों को तकनीकी कौशल से लैस कर उनकी आर्थिक स्वतंत्रता और सामाजिक उत्थान को बढ़ावा देना है। यह पहल न केवल स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर खोलेगी, बल्कि बस्तर जैसे क्षेत्रों में सामाजिक-आर्थिक विकास को भी गति प्रदान करेगी।
किरन्दुल से प्रशिक्षण की शुरुआत
रविवार शाम 4 बजे, किरन्दुल में आयोजित एक समारोह में एनएमडीसी के अधिशासी निदेशक रवींद्र नारायण ने 77 युवाओं को प्रशिक्षण केंद्र भेजने के लिए बस को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस अवसर पर उन्होंने युवाओं को उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं और इस पहल को सामुदायिक विकास की दिशा में एक मील का पत्थर बताया। समारोह में एनएमडीसी के उपमहाप्रबंधक (एचआर) के.एल. नागवेणी, सीएसआर प्रबंधक विवेक रक्षा सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे, जिन्होंने इस पहल के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
सीआईपीईटी के साथ साझेदारी
यह प्रशिक्षण कार्यक्रम सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ पेट्रोकेमिकल्स इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (सीआईपीईटी), हैदराबाद के सहयोग से संचालित किया जा रहा है। कार्यक्रम के तहत युवाओं को प्लास्टिक और पॉलिमर प्रौद्योगिकी में निःशुल्क तकनीकी शिक्षा प्रदान की जाएगी। एनएमडीसी ने ट्यूशन, प्रशिक्षण, आवास, भोजन और अन्य सभी खर्चों को पूर्ण रूप से प्रायोजित करने का बीड़ा उठाया है, जिससे युवाओं पर किसी भी तरह का आर्थिक बोझ न पड़े।
कौशल विकास के अवसर
इस कार्यक्रम में मशीन ऑपरेटर (एनएसक्यूएफ लेवल IV सर्टिफिकेशन) जैसे छह माह के अल्पकालिक पाठ्यक्रम शामिल हैं, जो 8वीं कक्षा उत्तीर्ण उम्मीदवारों के लिए उपलब्ध हैं। इन कोर्सों में प्लास्टिक प्रसंस्करण, इंजेक्शन मोल्डिंग और ब्लो मोल्डिंग जैसे क्षेत्रों में व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा। यह प्रशिक्षण युवाओं को न केवल तकनीकी कौशल से लैस करेगा, बल्कि उन्हें रोजगार के लिए तैयार भी करेगा।
बस्तर में सकारात्मक बदलाव की शुरुआत
एनएमडीसी की यह पहल आदिवासी समुदायों के लिए एक गेम-चेंजर साबित हो सकती है। बस्तर जैसे क्षेत्र, जो अक्सर सामाजिक-आर्थिक चुनौतियों का सामना करते हैं, वहां यह कार्यक्रम युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने और उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का वादा करता है। यह पहल न केवल व्यक्तिगत विकास को बढ़ावा देगी, बल्कि स्थानीय समुदायों की क्षमता को उजागर कर भारत की समग्र प्रगति में भी योगदान देगी।
निष्कर्ष
एनएमडीसी का यह कौशल विकास कार्यक्रम कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व के क्षेत्र में एक अनुकरणीय उदाहरण है। यह पहल न केवल आदिवासी युवाओं को सशक्त बनाएगी, बल्कि बस्तर और दंतेवाड़ा जैसे क्षेत्रों में समावेशी विकास को बढ़ावा देगी। एनएमडीसी की इस प्रतिबद्धता से प्रेरित होकर, अन्य संगठन भी सामुदायिक विकास के लिए ऐसे प्रयासों को अपना सकते हैं, जो भारत के सामाजिक-आर्थिक परिदृश्य को और मजबूत करेंगे।
